Posts

शिवरात्रि का व्रत कैसे रखे और किन-किन बातों का ध्यान रखे

Image
महाशिवरात्रि महाशिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना का मुख्य त्योहार माना जाता है। शिव को महाशिवरात्रि बहुत प्रिय है। शिवपुराण के ईशान संहिता के अनुसार, इस दिन ही शिव करोड़ों सूर्य के समान प्रभाव वाले रूप में अवतरित हुए थे। मान्यता है कि इसी दिन उनका और माता पार्वती का विवाह भी हुआ था। शिव का आर्शीवाद पाने के लिए भक्त व्रत भी रखते हैं। महाशिवरात्रि पर व्रत रखने का एक अलग ही महत्व है। आज हम आपको पावन महाशिवरात्रि पर्व के व्रत और उसमें किए जाने वाले विशेष भोजन से जुड़ी खास बातों के बारे में बताएंगे। व्रत के दौरान क्या आहार लेना चाहिए व्रत में विशेष भोजन किया जाता है। व्रत के समय संभव हो तो जूस का सेवन करना चाहिए, इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। शरीर दैनिक कार्यों को करने में सक्षम रहता है। सुबह के समय फलाहार करना चाहिए। फलाहार में संतरा, खीरा, पपीता, सेब आदि फल ले सकते हैं। महाशिवरात्रि के व्रत में भी सात्विक भोजन खाना चाहिए। अगर स्वास्थ्य संबंधी समस्या न हो तो बिना नमक के भी यह व्रत किया जा सकता है। वरना सेंधा नमक का सेवन किया जा सकता है। इसलिए इसका प्रयोग कर सकते हैं। इस...

रक्षाबंधन का त्यौहार

Image
रक्षाबंधन का त्यौहार रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है इसके पहली वाली पूर्णिमा गुरु-पूर्णिमा थी, जो गुरु और शिक्षकों को समर्पित थी तो इस पूर्णिमा को श्रावण-पूर्णिमा कहते हैं रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्योहार है  रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है।रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। रक्षाबंधन के दिन बाजार मे कई सारे उपहार बिकते है, उपहार और नए कपड़े खरीदने के लिए बाज़ार मे लोगों की सुबह से शाम तक भीड होती है। घर मे मे...

बाइबल का इतिहास - बाइबल किसने लिखी - पूर्ण परमात्मा कौन है ?

Image
बाइबल का इतिहास  :- बाइबल 40 लेखकों के द्वारा, 1500 साल की अवधि के दौरान लिखी गई। अन्य धार्मिक लेखों के विपरीत, बाइबल वास्तविक घटनाओं, स्थानों, लोगों और उनकी बातचीत का विवरण देती है घटित हुई इतिहासकारों ने बाइबल की प्रामाणिकता को बार–बार स्वीकारा है। लेखकों के लिखने के तरीके और उनके व्यक्तित्व का प्रयोग करते हुए, परमेश्वर हमें बताता है कि वह कौन है और उसे जानने का अनुभव क्या होता है। बाइबल के 40 लेखक, एक ही संदेश देते हैं: परमेश्वर, जिसने हमें रचा है, हमारे साथ एक रिश्ता रखना चाहता है। वह हमें उसे जानने के लिए और उस पर विश्वास करने के लिए कहता है। बाइबल हमें केवल प्रेरित ही नहीं करती, बल्कि हमें जीवन और परमेश्वर के बारे में बताती है। बाइबल में पूर्ण परमात्मा कर बारे में बताया गया था पर हमारे धर्म गुरुओं ने हमे गलत रास्ते पर ला दिया बाइबल में जिस परमेश्वर के बारे में बताया है उस पूर्ण परमेश्वर का सत्य ज्ञान हमे संत रामपाल जी महाराज ने दिया है संत रामपाल जी महाराज कहते हैं कि पूर्ण तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने बताया पूर्ण परमेश्वर के बाटे में :- पूर्ण परमात्मा...

KABIR ID GOD

Image
कबीर साहिब ने जीव आत्माओ को कलयुग में अपने निज घर सतलोक मे वापिस ले जाने का वर्णन किया है।  सतगुरु कबीर साहेब ने कहा कि हे निरंजन ! यदि मैं चाहूं तो तेरे सारे खेल को क्षण भर में समाप्त कर सकता हूं परंतु ऐसा करने से मेरा वचन भंग होता है। यह सोच कर मैं अपने प्यारे हंसों को यथार्थ ज्ञान देकर शब्द का बल प्रदान करके सतलोक ले जाऊंगा और कहा कि - कबीर साहेब ने धर्मदास जी को बताते हुए कहा कि धर्मदास इन जीवों की पुकार सुनकर मैं अपने सतलोक से जोगजीत का रूप बनाकर काल लोक में आया। तब इक्कीसवें ब्रह्मण्ड में जहां काल का निज घर है वहां पर तप्तशिला पर जीवों को भूनकर सुक्ष्म शरीर से गंध निकाला जा रहा था। मेरे पहुंचने के बाद उन जीवों की जलन समाप्त को गई। उन्होंने मुझे देखकर कहा कि हे पुरुष ! आप कौन हो? आपके दर्शन मात्रा से ही हमें बड़ा सुख व शांति का आभास हो रहा है। फिर मैंने बताया कि मैं पारब्रह्म परमेश्वर कबीर हूं। आप सब जीव मेरे लोक से आकर काल ब्रह्म के लोक में फंस गए हो। यह काल रोजाना एक लाख मानव के सुक्ष्म शरीर से गंध निकाल कर खाता है और बाद में नाना-प्रकार की योनियों में दण्ड भोगने क...

कबीर प्रकट दिवस विश्व का ऐतेहासिक दिवस 5 जून 2020

Image
आज हम आपको कबीर प्रकट दिवस के बारे में बताते हैं            सभी ग्रंथों से प्रमाणित होता है कि सभी धर्मों में एक ही परमेश्वर का वर्णन किया गया है । पूर्ण परमात्मा के गुणों को वेदों में दिए गए है  ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन। कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्रम् अत्येति रेभन्।। विलक्षण मनुष्य के बच्चे के रूप में प्रकट होकर पूर्ण परमात्मा कविर्देव अपने वास्तविक ज्ञानको अपनी कविर्गिभिः अर्थात् कबीर बाणी द्वारा पुण्यात्मा अनुयाइयों को कवि रूप में कविताओं, लोकोक्तियों के द्वारा वर्णन करता है। वह स्वयं सतपुरुष कबीर ही होता है। द्वापर युग में कबीर परमेश्वर की दया से पांडवों का अश्वमेध यज्ञ संपन्न हुआ। पांडवों की अश्वमेघ यज्ञ में अनेक ऋषि, महर्षि, मंडलेश्वर  उपस्थित थे यहां तक कि भगवान कृष्ण भी उपस्थित थे फिर भी उनका शंख नहीं बजा। कबीर परमेश्वर ने सुदर्शन सुपच वाल्मीकि के रूप में शंख बजाया और पांडवों का यज्ञ संपन्न किया। गरीबदास जी महाराज की वाणी में इसका प्रमाण...

बेरोजगरी के कारण ओर उपाय

Image
बेरोजगारी के कारण:- भारत की ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में  बेरोजगारी एक जटिल समस्या है जिसके अनेक कारण हैं जिनकी व्याख्या नीचे की गई है    भारत की ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में  बेरोजगारी एक जटिल समस्या है जिसके अनेक कारण हैं जिनकी व्याख्या नीचे की गई है: 1. वृद्धि की धीमी गति:- बेरोजगारी का मुख्य कारण वृद्धि की धीमी गति है । रोजगार का आकार, प्रायः बहुत सीमा तक, विकास के स्तर पर निर्भर करता है । आयोजन काल के दौरान हमारे देश ने सभी क्षेत्रों में बहुत उन्नति की है । परन्तु वृद्धि की दर, लक्षित दर की तुलना में बहुत नीची है । स्पष्ट है कि बी. हजारी और के. कृष्णामूर्ति ने विकास की प्रारम्भिक स्थिति में वृद्धि और रोजगार के बीच के संघर्ष का सही अवलोकन किया है, जोकि बेरोजगारी का मुख्य कारण है । 2. पिछड़ी हुई कृषि:- भारत में अल्प विकास और बेरोजगारी का भयंकर स्वरूप पिछड़ी हुई कृषि के कारण है जिससे कार्यों की प्रकृति भी पिछड़ जाती है । कृषि की विधियां अथवा तकनीकें और संगठन आरम्भिक है तथा पुराने हो चुके हैं । फलतः कृषि की उत्पादकता प्रति श्रमिक अथवा श्रम की प्रति...

कन्याभ्रूण हत्या एक माहा अभिशाप

Image
कन्या भ्रूण हत्या के कारण कन्या भ्रूण हत्या शताब्दियों से चला आ रहा है, खासतौर से उन परिवारों में जो केवल लड़का ही चाहते हैं। इसके पीछे विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक कारण भी है। अब समय बहुत बदल चुका है हालांकि, विभिन्न कारण और मान्यताएं कुछ परिवार में आज भी जारी है। आमतौर पर माता-पिता लड़की शिशु को टालते हैं क्योंकि उन्हें लड़की की शादी में दहेज़ के रुप में एक बड़ी कीमत चुकानी होती है। ऐसी मान्यता है कि लड़कियां हमेशा उपभोक्ता होती हैं और लड़के उत्पादक होते हैं। अभिवावक समझते हैं कि लड़का उनके लिये जीवन भर कमायेगा और उनका ध्यान देगा जबकि लड़की की शादी होगी और चली जायेगी। ऐसा मिथक है कि भविष्य में पुत्र ही परिवार का नाम आगे बढ़ायेगा जबकि लड़किया पति के घर के नाम को आगे बढ़ाती हैं। परिवार की नयी बहु पर लड़के को जन्म देने का दबाव रहता और इसी वजह से लिंग परीक्षण के लिये उन्हें दबाव बनाया जाता है और लड़की होने पर जबरन गर्भपात कराया जाता है। लड़की को बोझ समझने की एक मुख्य वजह लोगों की अशिक्षा, असुरक्षा और गरीबी है। विज्ञान में तकनीकी उन्नति और सार्थकता ने अभि...