बाइबल का इतिहास - बाइबल किसने लिखी - पूर्ण परमात्मा कौन है ?

बाइबल का इतिहास :-

बाइबल 40 लेखकों के द्वारा, 1500 साल की अवधि के दौरान लिखी गई। अन्य धार्मिक लेखों के विपरीत, बाइबल वास्तविक घटनाओं, स्थानों, लोगों और उनकी बातचीत का विवरण देती है घटित हुई इतिहासकारों ने बाइबल की प्रामाणिकता को बार–बार स्वीकारा है।

लेखकों के लिखने के तरीके और उनके व्यक्तित्व का प्रयोग करते हुए, परमेश्वर हमें बताता है कि वह कौन है और उसे जानने का अनुभव क्या होता है।

बाइबल के 40 लेखक, एक ही संदेश देते हैं: परमेश्वर, जिसने हमें रचा है, हमारे साथ एक रिश्ता रखना चाहता है। वह हमें उसे जानने के लिए और उस पर विश्वास करने के लिए कहता है।

बाइबल हमें केवल प्रेरित ही नहीं करती, बल्कि हमें जीवन और परमेश्वर के बारे में बताती है।

बाइबल में पूर्ण परमात्मा कर बारे में बताया गया था पर हमारे धर्म गुरुओं ने हमे गलत रास्ते पर ला दिया बाइबल में जिस परमेश्वर के बारे में बताया है उस पूर्ण परमेश्वर का सत्य ज्ञान हमे संत रामपाल जी महाराज ने दिया है संत रामपाल जी महाराज कहते हैं कि

पूर्ण तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने बताया पूर्ण परमेश्वर के बाटे में:-

पूर्ण परमात्मा यानी कि (पूर्ण ब्रह्म) अर्थात् सतपुरुष का ज्ञान न होने के कारण सर्व विद्वानों को ब्रह्म यानी कि (निरंजन/काल भगवान जिसे महाविष्णु भी कहते हैं) का ज्ञान है। पवित्र आत्माऐं चाहे वे ईसाई हो, मुसलमान हो, हिन्दू या सिख धर्म से सम्बन्धित हो इनको केवल एक ओंकार परमात्मा की पूजा का ही ज्ञान पवित्र शास्त्रो, पुराणों, वेदों, गीता आदि नामों से जाना जाता है) क्योंकि इन सर्व शास्त्रों में ज्योति स्वरूपी अर्थात् काल ब्रह्म की ही पूजा विधि का वर्णन है तथा जानकारी पूर्ण ब्रह्म यानी कि (सतपुरुष)

 पूर्ण संत न मिलने से पूर्ण ब्रह्म की पूजा का ज्ञान नहीं हुआ। जिस कारण से पवित्र आत्माऐं ईसाई का पूर्ण ज्ञान नही हुआ  जबकि पवित्र बाईबल में उत्पत्ति विषय के सृष्टि की उत्पत्ति नामक अध्याय में लिखा है कि प्रभु ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया तथा छः दिन में सृष्टि रचना करके सातवें दिन विश्राम किया। इससे स्वसिद्ध है कि प्रभु भी मनुष्य जैसे आकार में है। इसी का प्रमाण पवित्र क़ुरान शरीफ में भी है। इसी प्रकार पवित्र आत्माऐं मुस्लमान प्रभु को (निराकार) अल्लाह (प्रभु) कहते हैं, जबकि पवित्र क़ुरान शरीफ के सुरत फूर्कानि संख्या 25, आयत संख्या 52 से 59 में लिखा है कि जिस प्रभु ने छः दिन में सृष्टि रची तथा सातवें दिन तख्त पर जा विराजा, उसका नाम कबीर है। पवित्र क़ुरान को बोलने वाला प्रभु किसी और कबीर नामक प्रभु की तरफ संकेत करके कह रहा है कि वही कबीर प्रभु ही पूजा के योग्य है, पाप क्षमा करने वाला है, परन्तु उसकी भक्ति के विषय में मुझे ज्ञान नहीं, किसी तत्वदर्शी संत से पूछो।इस प्रकार 


सभी ग्रंथो में दिया है प्रमाण


उपरोक्त दोनों पवित्र शास्त्रों (पवित्र बाईबल व पवित्र क़ुरान शरीफ) ने मिल-जुल कर सिद्ध कर दिया है कि परमेश्वर मनुष्य  शरीर युक्त है। उसका नाम कबीर है। पवित्र आत्माऐं हिन्दू व सिख उसे निरंकार(निराकार) के नाम से जानते हैं। जबकि आदरणीय नानक साहेब जी ने सतपुरुष के आकार रूप में दर्शन करने के पश्चात् अपनी अमृतवाणी महला पहला ‘श्रीगुरु ग्रन्थ साहेब‘ में पूर्ण ब्रह्म का आकार होने का प्रमाण दिया है, लिखा है ‘‘धाणक रूप रहा करतार(पृष्ठ 24), हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार (पृष्ठ 721)‘‘ तथा प्रभु के मिलने से पहले पवित्र हिन्दू धर्म में जन्म होने के कारण श्री ब्रजलाल पाण्डे से पवित्रा गीता जी को पढ़कर श्री नानक साहेब जी ब्रह्म को निराकार कहा करते थे। उनकी दोनों प्रकार की अमृतवाणी गुरु ग्रन्थ साहेब मे लिखी हैं। हिन्दुओं के माने जाने वाले शास्त्रों में पवित्र वेद व गीता विशेष हैं, उनके साथ-2 अठारह पुराणों को भी समान दृष्टी से देखा जाता है। श्रीमद् भागवत सुधासागर, रामायण, महाभारत भी विशेष प्रमाणित शास्त्रों में से हैं। विशेष विचारणीय विषय यह है कि वर्तमान में जिन पवित्र शास्त्रों को हिन्दुओं के शास्त्र कहा जाता है, जैसे पवित्रा चारों वेद व पवित्र श्रीमद् भगवत गीता जी आदि, वास्तव में ये सद् शास्त्र केवल पवित्र हिन्दु धर्म के ही नहीं हैं। ये सर्व शास्त्र महर्षि व्यास जी द्वारा उस समय लिखे गए थे जब कोई अन्य धर्म नहीं था। इसलिए पवित्र वेद व पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी तथा पवित्र पुराणादि सर्व शास्त्र मानव मात्र के कल्याण के लिए हैं। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी है ये सिद्ध होता हैं सभी धर्म ग्रंथो मै।

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